New Delhi: बिहार की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 18 महीने पहले महागठबंधन का हाथ छोड़कर बीजेपी के साथ फिर हाथ मिला लिया है। इसी फैसले पर तेज प्रताप यादव ने तीखे शब्दों में अपनी नाराजगी जताई और नीतीश कुमार पर चुटकी लेते हुए ‘गिरगिट रत्न’ अवॉर्ड देने का सुझाव दिया।

तेज प्रताप का तीखा कटाक्ष:

लालू यादव के बड़े बेटे और महागठबंधन सरकार में मंत्री रहे तेज प्रताप यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “गिरगिट रंग बदलने के लिए बदनाम है…पलटिस कुमार को भी बार-बार राजनीतिक वफादारी बदलने के लिए ‘गिरगिट रत्न’ अवॉर्ड से सम्मानित किया जाना चाहिए…रंग बदलने की उनकी गति के लिए!”

नीतीश का चौथा पलटोव:

यह कोई पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार ने पाला बदला है। 2013 से लगातार वे महागठबंधन और एनडीए के बीच आते-जाते रहे हैं। रविवार को उन्होंने यह चौथा पलटोव करार दिया है।

तेज प्रताप ने किया फैसले का विरोध:

तेज प्रताप यादव ने अपने पोस्ट में महागठबंधन छोड़ने के नीतीश के फैसले का विरोध करते हुए कहा, “गठबंधन के अंदर की स्थिति अनुकूल नहीं थी। मैंने अपनी पार्टी के नेताओं के सभी विचारों पर विचार करने के बाद आज अपना इस्तीफा दे दिया।”

नीतीश कुमार ने ली नौवीं बार मुख्यमंत्री की शपथ:

महागठबंधन से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के समर्थन के साथ नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ ही बीजेपी के दो नेताओं – सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मंत्रियों की सूची में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) (HAM-S) पार्टी के सदस्य और एक निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं।

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बिहार विधानसभा की वर्तमान स्थिति:

वर्तमान में 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में आरजेडी के 79 विधायक हैं; उसके बाद बीजेपी के 78; जद (यू) के 45, कांग्रेस के 19, सीपीआई (एम-एल) के 12, सीपीआई (एम) और सीपीआई के 2-2, और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 4 हैं। अन्य दो सीटें एआईएमआईएम और एक निर्दलीय के पास हैं।

इस लेख में क्या खास है:

  • तेज प्रताप यादव का नीतीश कुमार पर तीखा कटाक्ष।
  • 2013 से नीतीश कुमार के चौथे पलटोव पर प्रकाश।
  • बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण।
  • टेबल के माध्यम से विधानसभा की सीटों का विभाजन।

आपको क्या लगा?

क्या आप मानते हैं कि नीतीश कुमार का यह फैसला सही था? बिहार की राजनीति में आगे क्या होने वाला है? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।

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