New Delhi: भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज शुभमन गिल इन दिनों खराब फॉर्म से गुजर रहे हैं। हैदराबाद में इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे पहले टेस्ट में भी गिल फ्लॉप रहे। उन्होंने पहली पारी में 23 रन और दूसरी पारी में 10 रन ही बनाए। गिल की खराब फॉर्म के कारण उनकी टीम से बाहर होने की भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

गिल की खराब फॉर्म की 3 वजहें:

  • खराब तकनीक: गिल की खराब फॉर्म की एक वजह उनकी खराब तकनीक भी मानी जा रही है। गिल अक्सर ऑफ स्टंप से बाहर की गेंदों पर खेलने में गलती करते हैं। इससे वह जल्दी आउट हो जाते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक दबाव: गिल पर टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करने का दबाव भी हो सकता है। इससे भी उनकी बल्लेबाजी पर असर पड़ रहा है।
  • लय में नहीं आ पाना: गिल पिछले कुछ समय से लगातार खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं। इससे उन्हें लय में नहीं आ पा रहा है।

गिल की टीम में जगह खतरे में:

गिल की खराब फॉर्म के कारण उनकी टीम में जगह खतरे में पड़ सकती है। भारतीय टीम में कई ऐसे युवा बल्लेबाज हैं, जो गिल की जगह ले सकते हैं। इनमें शुभमन सैमसन, देवदत्त पडिक्कल और श्रेयस अय्यर शामिल हैं।

क्या गुम हो गई गिल की चमक?

हैदराबाद टेस्ट में एक बार फिर फ्लॉप होने के बाद शुभमन गिल के चेहरे पर मायूसी दिखना लाज़मी है। ये वो खिलाड़ी हैं जिन्हें टीम इंडिया का भविष्य माना जाता था, उनकी बैट से रनों का बरसना किसी तमाशे से कम नहीं होता था। मगर कुछ समय से लगातार आउट और कम स्कोर ने उनकी चमक को थोड़ा फीका जरूर कर दिया है।

फ्लॉप का तिलिस्म क्यों नहीं टूट रहा?

इस सवाल का जवाब भी उतना ही पेचीदा है, जितना शुभमन का बल्लेबाजी का पंजा रहा करता था। कई जानकार मानते हैं कि वजहों का गुलदस्ता है:

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  • तकनीकी खामियां: अक्सर ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों पर छेड़छाड़ करना गिल के लिए मुसीबत बन जाता है। ये गेंदें उन्हें लुभाती हैं और विकेट के लालच में वो अपना विकेट गंवा बैठते हैं।
  • मनोवैज्ञानिक दबाव: भविष्य के स्टार के तमगे से लदे गिल पर अपने प्रदर्शन को साबित करने का जबरदस्त दबाव है। ये दबाव उनकी बल्लेबाजी में जकड़न पैदा कर सकता है, जिससे लय हिलती है।
  • लय का लुका-छिपी खेल: लगातार फ्लॉप से उनकी लय बिगड़ चुकी है। एक दो अच्छे शॉट जमने से पहले ही कोई ना कोई गलती उन्हें पवेलियन की ओर पहुंचा देती है।

टीम से बाहर होने का खतरा? हवा में तलवार!

ये सवाल किसी को भी झकझोर सकता है। भारतीय क्रिकेट का टैलेंट पावरहाउस है, गिल की जगह लेने के लिए कई बेहतरीन बल्लेबाज बैंच पर इंतजार कर रहे हैं। शुभमन सैमसन, देवदत्त पडिक्कल और श्रेयस अय्यर जैसे नाम किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अगर गिल जल्द ही फॉर्म में नहीं लौटे, तो उनका बाहर होना लाज़मी सा लगता है।

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क्या अभी उम्मीद की किरण बची है? निश्चित रूप से!

गिल का टैलेंट किसी संदेह से परे है। उनकी बैट में वो जादू है जो स्टेडियम को तालियां बजाने पर मजबूर कर सकता है। उन्हें बस जरूरत है:

  • अपनी तकनीक में सुधार की: अनुभवी कोचों की मदद से वो उन तकनीकी खामियों को दूर कर सकते हैं जो उनके लिए मुसीबत बन रही हैं।
  • मनोवैज्ञानिक मजबूती की: खेल के दिग्गजों से सलाह, मेडिटेशन या किसी अन्य तकनीक के जरिए उन्हें अपने ऊपर बने दबाव को कम करने की जरूरत है।
  • फॉर्म पाने के लिए कड़ी मेहनत की: नेट्स में घंटों पसीना बहाया, खेल के शतरंज को समझा, अपनी कमजोरियों पर काम किया – यही फॉर्म में वापसी का सबसे कारगर हथियार है।

शुभमन गिल की राह आसान नहीं है, लेकिन उनकी प्रतिभा ने पहले भी पहाड़ों को हिलाया है। ये वही युवा है जिसने अंडर-19 वर्ल्ड कप जीता था, जिसने सीनियर क्रिकेट में धमाकेदार एंट्री ली थी। उम्मीद करते हैं कि वो फॉर्म में लौटकर एक बार फिर साबित करें कि क्यों शुभमन गिल का नाम भारतीय क्रिकेट के सुनहरे भविष्य के साथ लिखा जाता है।

निष्कर्ष:

गिल को अपनी खराब फॉर्म से उबरने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। उन्हें अपनी तकनीक में सुधार करना होगा और मनोवैज्ञानिक दबाव से उबरना होगा। अगर गिल जल्द ही फॉर्म में नहीं आते हैं, तो उन्हें टीम से बाहर का सामना करना पड़ सकता है।

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