New Delhi: हाल ही में आरबीआई ने एक महत्वपूर्ण फैसला किया है जो सिबिल स्कोर के मामले में है, और नए नियमों की शुरुआत की है। इसके अनुसार, अगर कोई क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस (बैंक और एनबीएफसी) और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी किसी व्यक्ति की गलत क्रेडिट रिपोर्ट में सुधार में देरी करते हैं, तो उस व्यक्ति को मुआवजा मिलना चाहिए। इस नए नियम के बारे में पूरी जानकारी के लिए पूरा आर्टिकल पढ़ें।

सिबिल स्कोर और उससे जुड़े नए नियम

बैंकों की ओर से अक्सर देखा जाता है कि व्यक्ति के लोन के सम्बंध में गलत जानकारी को सिबिल स्कोर में अपडेट कर दिया जाता है, जिसके कारण उस व्यक्ति को अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में सुधार कराने में महीनों का समय लग जाता है, और उसका क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए आरबीआई ने एक नया नियम लागू किया है।

नए नियम के मुताबिक मुआवजा प्रक्रिया

आरबीआई ने नए नियमों के अनुसार कहा है कि अगर कोई क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी गलत क्रेडिट रिपोर्ट को सही नहीं करती है और इसमें देरी होती है, तो उस व्यक्ति को मुआवजा देने की पूरी प्रक्रिया होनी चाहिए। इस प्रक्रिया के अनुसार, अगर गलत क्रेडिट रिपोर्ट की शिकायत करने के 30 दिनों के भीतर उसे सही नहीं किया जाता है, तो शिकायकर्ता को कैलेंडर दिन के हिसाब से 100 रुपये प्रति दिन का मुआवजा दिया जाएगा।

मुआवजा का प्राप्ति प्रक्रिया

इसके साथ ही, जानकारी के मुताबिक, अगर क्रेडिट इंस्टीट्यूशन 21 कैलेंडर दिनों के भीतर गलत क्रेडिट रिपोर्ट की शिकायत को नहीं ठीक करता है, तो ये मुआवजा क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस की ओर से शिकायतकर्ता को दिया जाएगा।

अलर्ट सिस्टम का शुरुआती अपनाव

आरबीआई ने 26 अक्टूबर को जारी किए गए सर्कुलर में यह भी कहा है कि अब जब कोई बैंक या एनबीएफसी किसी व्यक्ति की क्रेडिट रिपोर्ट चेक करती है, तो उसे इसकी सूचना सीधे रूप से सिबिल स्कोर एसएमएस और ईमेल के माध्यम से क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी और क्रेडिट इंस्टीट्यूशंस के द्वारा दी जानी चाहिए। इससे गलत जानकारी को सही करने में जल्दी होगी और लोगों को मुआवजा प्राप्त करने में सहायक होगा। यह नया नियम 26 अक्टूबर को जारी किया गया और इसका पूरा अमल छह महीने बाद से होगा।

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