Sports News: भारत की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने बुधवार को संन्यास की घोषणा कर दी। 41 साल की मैरी कॉम ने कहा कि वे उम्र सीमा के कारण आगे प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकती हैं।

मैरी कॉम ने अपना आखिरी मुकाबला कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के ट्रायल के दौरान खेला था। उस मुकाबले में वे हार गई थीं।

मैरी कॉम ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। वे 6 बार की वर्ल्ड चैंपियन हैं, जो कि एक महिला मुक्केबाज का सबसे अधिक विश्व खिताब जीतने का रिकॉर्ड है। इसके अलावा, उन्होंने 2012 लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता था।

मैरी कॉम के संन्यास पर पूरे देश से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उन्हें संदेश भेजकर बधाई दी है।

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विवादों से भी रहा नाता

मैरी कॉम के करियर में कुछ विवाद भी रहे हैं। 2020 टोक्यो ओलिंपिक में उन्होंने रेफरी के फैसले पर सवाल उठाया था, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। इसके अलावा, उन्होंने जर्सी पर नाम छपवाने को लेकर भी विवाद किया था।

प्रोफेशनल बॉक्सिंग का विकल्प

मैरी कॉम भले ही एमेच्योर बॉक्सिंग से संन्यास ले चुकी हों, लेकिन उनके पास प्रोफेशनल बॉक्सिंग का विकल्प है। इससे पहले, विजेंद्र सिंह भी प्रोफेशनल बॉक्सर बन चुके हैं।

मैरी कॉम ने दिसंबर में कहा था कि वे पेशेवर बॉक्सिंग कर सकती हैं, लेकिन अभी यह साफ नहीं है।

मैरी कॉम की उपलब्धियां

  • 6 बार की वर्ल्ड चैंपियन (2002, 2005, 2006, 2008, 2010, 2018)
  • 2012 लंदन ओलिंपिक में ब्रॉन्ज मेडल
  • 5 बार की एशियाई चैंपियन
  • 2010 एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल
  • 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल

हालांकि मैरी कॉम के रिंग छोड़ने से एक युग का अंत हो गया है, लेकिन उनके जाने का भारतीय बॉक्सिंग पर दीर्घकालिक प्रभाव अहम होगा। आइए देखें ये कैसे हो सकते हैं:

युवा बॉक्सरों के लिए प्रेरणा:

मैरी कॉम की कहानी एक गरीब गांव की लड़की से विश्व चैंपियन तक के सफर की प्रेरणा बनी रहेगी। उनका दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम आने वाली पीढ़ियों के भारतीय बॉक्सरों को प्रेरित करेगा। उनके संन्यास के बाद से देश भर में युवा महिलाओं द्वारा बॉक्सिंग में बढ़ती रुचि देखी जा सकती है।

महिला बॉक्सिंग को बढ़ावा:

मैरी कॉम ने अकेले अपने दम पर भारतीय महिला बॉक्सिंग का स्तर उठाया है। उनके संन्यास के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नए प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरते हैं और इस सफलता को आगे बढ़ाते हैं। सरकार और खेल संस्थाओं को महिला बॉक्सिंग में निवेश को बनाए रखना चाहिए ताकि आधार को मजबूत किया जा सके।

कोचिंग की भूमिका:

मैरी कॉम को बॉक्सिंग जगत का अनुभव का खजाना माना जाता है। अगर वो कोचिंग की भूमिका निभाती हैं, तो यह भारतीय महिला बॉक्सिंग के लिए बड़ी ताकत साबित होगा। उनका ज्ञान और कौशल युवा बॉक्सरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने में मदद कर सकता है।

प्रोफेशनल बॉक्सिंग का भविष्य:

मैरी कॉम के प्रोफेशनल बॉक्सिंग में आने की अटकलें लगाई जा रही हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय प्रोफेशनल बॉक्सिंग को वैश्विक मानचित्र पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनका नाम और अनुभव प्रायोजकों और दर्शकों को आकर्षित करेगा, जिससे इस खेल के विकास को गति मिलेगी।

निष्कर्ष:

एमसी मैरी कॉम के संन्यास से भले ही एक युग का अंत हो, लेकिन उनके जाने का भारतीय बॉक्सिंग पर दीर्घकालिक प्रभाव रहेगा। उनके अनुभव और ज्ञान को संरक्षित कर अगली पीढ़ी को तैयार करना भारतीय बॉक्सिंग की सफलता के लिए अहम होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनका अगला कदम क्या होता है और भारतीय बॉक्सिंग के भविष्य में उनकी क्या भूमिका रहती है।

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