New Delhi: भारत, जो विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के साथ गर्व महसूस कर रहा है, उसे एक नई चुनौती का सामना करना हो रहा है – बढ़ता हुआ कर्ज। वित्त वर्ष 2022-23 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत का कुल कर्ज 2.34 ट्रिलियन डॉलर या लगभग 200 लाख करोड़ रुपये था, जो सितंबर तिमाही तक बढ़कर 2.47 ट्रिलियन डॉलर या 205 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और कर्ज का बोझ

भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के साथ एक आदर्श उदाहरण बना हुआ है। लेकिन इसी समय, हमें यह भी देखना है कि कर्ज का बोझ भी साथ में बढ़ रहा है, जिसका सख्ती से दावा आंकड़े भी कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर तक चलने वाले वित्त वर्ष में भारत का कुल कर्ज 2.47 ट्रिलियन डॉलर या 205 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इस दौरान डॉलर की मूल्यवृद्धि ने भी इसे प्रभावित किया है, जिससे कर्ज के आंकड़ों में वृद्धि हुई है।

आंकड़ों से पता चला: भारत का कर्जागार

पिछले वित्त वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही में कुल कर्ज 2.34 ट्रिलियन डॉलर या लगभग 200 लाख करोड़ रुपये था, जिसकी विशेषता इंडियाबॉन्ड्स डॉट कॉम के सह-संस्थापक विशाल गोयनका ने की है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि सितंबर तिमाही में केंद्र सरकार का कर्ज 161.1 लाख करोड़ रुपये था, जो मार्च तिमाही की 150.4 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़ गया है। इसके साथ ही राज्य सरकारों का कुल कर्ज 50.18 लाख करोड़ रुपये है। यह बात गौरतलब है कि इस अवधि में अमेरिकी डॉलर की कीमत में वृद्धि का भी प्रभाव है, जिससे कर्ज के आंकड़ों पर और भी प्रभाव पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार: कर्ज का विश्लेषण और आंकड़ों की रोशनी

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर आधारित, सितंबर तिमाही तक कुल कर्ज का आंकड़ा 2.47 ट्रिलियन डॉलर या 205 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार का कर्ज सितंबर तिमाही में 161.1 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मार्च तिमाही की 150.4 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़ गया है। इसके अलावा, राज्य सरकारों का कुल कर्ज 50.18 लाख करोड़ रुपये है। इस विस्तार से देखा जा सकता है कि इस अवधि में डॉलर की मूल्य में वृद्धि का भी प्रभाव है, जो कर्ज के आंकड़ों को बढ़ाता है।

रिपोर्ट के अनुसार: कर्ज का विश्लेषण और आंकड़ों की रोशनी

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर आधारित, सितंबर तिमाही तक कुल कर्ज का आंकड़ा 2.47 ट्रिलियन डॉलर या 205 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार का कर्ज सितंबर तिमाही में 161.1 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मार्च तिमाही की 150.4 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़ गया है। इसके अलावा, राज्य सरकारों का कुल कर्ज 50.18 लाख करोड़ रुपये है। इस विस्तार से देखा जा सकता है कि इस अवधि में डॉलर की मूल्य में वृद्धि का भी प्रभाव है, जो कर्ज के आंकड़ों को बढ़ाता है।

रिपोर्ट में पेश किए गए ये आंकड़े

इंडियाबॉन्ड्स डॉट कॉम की ये रिपोर्ट RBI, CCI, और Sebi से जुटाए गए आंडकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार पर 161.1 लाख करोड़ रुपये, यानी कुल कर्ज का सर्वाधिक 46.04 फीसदी है। इसके अलावा, राज्यों की हिस्सेदारी 50.18 लाख करोड़ रुपये है, जो 24.4 फीसदी का हिस्सा है। रिपोर्ट में राजकोषीय खर्च का ब्योरा भी दिया गया है, जो 9.25 लाख करोड़ रुपये है और ये कुल कर्ज का 4.51 फीसदी होता है। इसके अलावा चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कुल कर्ज में कॉरपोरेट बॉन्ड की हिस्सेदारी 21.52 फीसदी थी, जो 44.16 लाख करोड़ रुपये होती है।

IMF ने कर्ज को लेकर चेताया
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को कर्ज के लिए चेताया है. IMF ने कहा है कि केंद्र और राज्यों को मिलाकर भारत का सामान्य सरकारी कर्ज मध्यम अवधि में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 100 फीसदी से ऊपर पहुंच सकता है. अगर ऐसा हुआ तो भारत को लम्बे समय के अनुसार कर्जा चुकाने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, आईएमएफ की इस रिपोर्ट पर केंद्र सरकार ने असहमति व्यक्त की है और उसका मानना है कि सरकारी कर्ज से जोखिम काफी कम है, क्योंकि ज्यादातर कर्ज भारतीय मुद्रा यानी रुपये में ही है।

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