पेटीएम के शेयरों में फिर 20% की गिरावट: पेटीएम के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कंपनी के लोन कारोबार पर सख्त कार्रवाई के बाद लगातार दूसरे दिन पेटीएम के शेयरों में 20% की लोअर सर्किट लग गई। इसका मतलब ये है कि 2 फरवरी को शेयर बाजार बंद होने तक पेटीएम के शेयर 20% नीचे 650.65 रुपये के स्तर पर आ गए थे। इससे पहले जनवरी में भी आरबीआई ने कंपनी पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे।

आरबीआई ने पेटीएम को 29 फरवरी के बाद नए डिपॉजिट लेने और लोन देने पर रोक लगा दी है। इस कदम का ब्रोकरेज फर्मों ने कड़ा रुख अपनाते हुए पेटीएम के शेयरों के टारगेट प्राइस में भारी कटौती की है।

जेफरीज ने पेटीएम को ‘अंडरपरफॉर्म’ में डाउनग्रेड करते हुए टारगेट प्राइस को 1,050 रुपये से आधे से ज्यादा घटाकर 500 रुपये कर दिया। मैक्वेरी ने भी टारगेट प्राइस को 650 रुपये प्रति शेयर घटा दिया, लेकिन स्टॉक पर ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखा। उनका मानना है कि आरबीआई द्वारा पाए गए उल्लंघनों को देखते हुए निकट भविष्य में पेटीएम की समस्याओं का कोई समाधान नहीं दिखता। बर्नस्टीन के विश्लेषकों ने भी आरबीआई के निर्देश को नकारात्मक विकास माना और कहा कि यह पहले से ही भारी नियामकीय दबाव को और बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि “वास्तव में, आरबीआई की कार्रवाइयां पेटीएम पेमेंट्स बैंक के संचालन को समाप्त कर देती हैं।”

पूरी खबर के लिए पढ़े- पेटीएम के शेयरों में फिर 20% की गिरावट, क्या निकट भविष्य में राहत की कोई उम्मीद नहीं?

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इस घटना के बाद कंपनी ने कहा कि वह कुछ हफ्तों के लिए अपने लोनिंग प्लेटफॉर्म के संचालन को रोक रही है और बैंकों के साथ साझेदारी के लिए बातचीत कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि इससे उसके वार्षिक ईबीआईटीडीए पर 300-500 करोड़ रुपये का सबसे बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, फंड मैनेजरों और विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे अर्निंग पर शेयर (ईपीएस) पर 5-15% का असर पड़ सकता है, जिससे कंपनी के लाभप्रदता हासिल करने के प्रयासों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्या निवेशकों को चिंतित होना चाहिए?

पेटीएम के लिए मौजूदा हालात निश्चित रूप से चिंताजनक हैं। कंपनी को नियामकीय दबाव, प्रतिस्पर्धा और लाभप्रदता हासिल करने की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि क्या कंपनी इन चुनौतियों से पार पा सकेगी और अपने निवेशकों के लिए मूल्य सृजन कर पाएगी। निवेशकों को कंपनी के भविष्य के बारे में किसी भी निर्णय लेने से पहले सावधानी से विचार करना चाहिए और पेशेवर सलाह लेनी चाहिए।

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